दिमागी नक्सली
छिपे, पहने कई लिबास।
बात-बात पर देश का, करते हैं उपहास॥
राष्ट्रहितों को भूलकर, करते अपना काम।
शब्दों से विष घोलते, करें देश बदनाम।
भारत की माटी कहे, रखिए मन में आस—
दिमागी नक्सली छिपे, पहने कई लिबास॥
झूठी बातों के तले, भ्रम फैलाएँ खूब।
सच्चाई के सामने, जाएँ अक्सर डूब।
राष्ट्रप्रेम की राह पर, बढ़े जन-विश्वास—
बात-बात पर देश का, करते हैं उपहास॥
लड़े विचारों से उचित, हिंसा का न हो स्थान।
लोकतंत्र की राह में, रखें सत्य का मान।
मतभेदों में भी रहे, मर्यादा का वास—
दिमागी नक्सली छिपे, पहने कई लिबास॥
देश-विरोधी सोच से, बचकर रहें जवान।
ज्ञान-विवेक की रोशनी, रखे देश की शान।
इकजुट भारत के लिए, जन-जन करें प्रयास—
बात-बात पर देश का, करते हैं उपहास॥
— डॉ. सत्यवान सौरभ
