मुक्तक/दोहा

नन्हा मन, नई उड़ान

नन्हे हाथों में सजे,
सपनों के संसार।
कंप्यूटर से सीखता,
बच्चा नया विचार॥

देखे चित्रों में छिपे,
ज्ञान भरे उपहार।
खेल-खेल में सीखता,
जीवन का व्यवहार॥

पढ़ना-लिखना सीखकर,
बढ़ता जाए ज्ञान।
मेहनत से ही एक दिन,
ऊँचा होगा मान॥

किताबों से दोस्ती,
गुरु का रख सम्मान।
अच्छी बातें सीखकर,
रोशन करे जहान॥

दूध-फल और जल पिए,
रखे तन को तंदुरुस्त।
खेल-कूद से खिल उठे,
मन भी रहे चुस्त॥

माँ-बाबा का मान रख,
सबका कर सम्मान।
नन्हा दीपक बनकर तू,
रोशन कर संसार॥

मोबाइल हो या कंप्यूटर,
साधन हैं ये मात्र।
ज्ञान बढ़ाने में करें,
इनका उपयोग पात्र॥

आज नन्ही सी उम्र है,
कल होगा बलवान।
सच्चाई और नेकियों से,
बनना बड़ा इंसान॥

— डॉ. प्रियंका ‘सौरभ’

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh