भजन/भावगीत

शिव जी हैं अविनाशी

शिव जी बसे हैं मेरे दिल में, उनकी महिमा न्यारी
अवघड़दानी शिव बाबा को, पूजे दुनिया सारी-
कहलाते कैलाशी, शिव जी हैं अविनाशी-

आक-धतूरा खाते, फल-फूलों से खुश हो जाते
जिसने जो भी मांगा देकर खुशियां शिव जी पाते
कहलाते कैलाशी, शिव जी हैं अविनाशी-

श्रद्धा भाव निष्काम भावना भोले को है प्यारी
तीन लोक के अंतर्यामी उनकी लीला न्यारी
कहलाते कैलाशी, शिव जी हैं अविनाशी-

गणपति गौरां सहित प्रभु मेरे दिल में हरदम रहते
उनकी भक्ति में मेरे दिन-रैन चैन से कटते
कहलाते कैलाशी, शिव जी हैं अविनाशी-

खुद पर्वत पर रहते भक्तों को हैं महल दिलाते
खुद विष पीकर भी हँसना शिव जी हमको सिखाते
कहलाते कैलाशी, शिव जी हैं अविनाशी-

— लीला तिवानी

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244