शिव जी हैं अविनाशी
शिव जी बसे हैं मेरे दिल में, उनकी महिमा न्यारी
अवघड़दानी शिव बाबा को, पूजे दुनिया सारी-
कहलाते कैलाशी, शिव जी हैं अविनाशी-
आक-धतूरा खाते, फल-फूलों से खुश हो जाते
जिसने जो भी मांगा देकर खुशियां शिव जी पाते
कहलाते कैलाशी, शिव जी हैं अविनाशी-
श्रद्धा भाव निष्काम भावना भोले को है प्यारी
तीन लोक के अंतर्यामी उनकी लीला न्यारी
कहलाते कैलाशी, शिव जी हैं अविनाशी-
गणपति गौरां सहित प्रभु मेरे दिल में हरदम रहते
उनकी भक्ति में मेरे दिन-रैन चैन से कटते
कहलाते कैलाशी, शिव जी हैं अविनाशी-
खुद पर्वत पर रहते भक्तों को हैं महल दिलाते
खुद विष पीकर भी हँसना शिव जी हमको सिखाते
कहलाते कैलाशी, शिव जी हैं अविनाशी-
— लीला तिवानी
