कविता

चारपाई की अदालत

सुना है कि कर्मों का हिसाब- किताब
रखते हैं चित्रगुप्त
ईश्वर परिणाम घोषित करते हैं
और यमराज लागू
न जाने ये कितना सच है, कितना झूठ!

किंतु एक ठोस सच
हम सब देखे हैं
देख रहे हैं और आगे भी देखेंगे
हमारी साढ़े तीन हाथ की देह
घर के बाहरी कोने में
पौने चार हाथ की चारपाई पर
हो जाती है निढाल जब
करवट बदलने में बेहाल जब
लाचार असहाय और बदहाल जब
तब……
तब उस देह के कर्मों का हिसाब
चित्रगुप्त नहीं, ईश्वर नहीं
यमराज भी नहीं
संतानें लगाती हैं
साथी सहमते हैं, भाई झल्लाते हैं
मक्खियां भिनभिनाती हैं
बिस्तर पर हुई लीपा पोती
वारिस चींख चींखकर बताते हैं
परिजन धड़ल्ले से परिणाम सुनाते हैं
“बूढ़ा रात-दिन खांस खांसकर जीना मुश्किल कर दिया है
न जाने कब जाएगा
हम चैन से कब जी सकेंगे……”
चारपाई पर पड़ा
अतीत का सिकंदर
छुप छुपाकर आंसू बहाता है
जीवन भर का नास्तिक
गलकट, दबंग, लुटेरा, हकमार…..
चारपाई की अदालत में
अपनी देह छोड़ जाता है।

— डॉ. अवधेश कुमार अवध

*डॉ. अवधेश कुमार अवध

नाम- डॉ अवधेश कुमार ‘अवध’ पिता- स्व0 शिव कुमार सिंह जन्मतिथि- 15/01/1974 पता- ग्राम व पोस्ट : मैढ़ी जिला- चन्दौली (उ. प्र.) सम्पर्क नं. 919862744237 Awadhesh.gvil@gmail.com शिक्षा- स्नातकोत्तर: हिन्दी, अर्थशास्त्र बी. टेक. सिविल इंजीनियरिंग, बी. एड. डिप्लोमा: पत्रकारिता, इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग व्यवसाय- इंजीनियरिंग (मेघालय) प्रभारी- नारासणी साहित्य अकादमी, मेघालय सदस्य-पूर्वोत्तर हिन्दी साहित्य अकादमी प्रकाशन विवरण- विविध पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन नियमित काव्य स्तम्भ- मासिक पत्र ‘निष्ठा’ अभिरुचि- साहित्य पाठ व सृजन

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