कविता

बंधन-कटैया श्री कृष्ण

विधा- कविता
शीर्षक- बंधन-कटैया श्री कृष्ण

जब-जब धर्म की हानि होती, प्रभु लेते अवतार हैं,
द्वापर में श्री कृष्ण रूप में, आए कृष्ण मुरार हैं।

बंधनों के बीच जेल में, जन्म लिया श्री कृष्ण ने,
बंधनों को काटने का, बीड़ा लिया श्री कृष्ण ने।

माता-पिता के बंधन काटे, प्रहरियों की बेड़ियां,
लज्जा की कभी प्रेम की, कभी रूढ़ियों की बेड़ियां।

कंस के रूप में परतंत्रता की बेड़ियां काटते कृष्ण,
गीता-ज्ञान रूप में अज्ञान की बेड़ियां काटते कृष्ण।

नरकासुर की कैद में बंद सोलह हजार कुमारियां,
नाम अपना दिया उनको, काट दीं गुलामी की बेड़ियां।

ऊंच-नीच की बेड़ियां काटीं, गरीब सुदामा से की मिताई,
रणक्षेत्र में अन्याय की बेड़ियां काटीं, चलने न दी ढिठाई।

सोलह कलाओं से सम्पन्न अवतारी कलापुरुष थे कृष्ण,
क्रीड़ाओं के, लीलाओं के, भगवान जगन्नाथ के रूप थे कृष्ण।

रास-रचैया, धेनु-चरैया, गोवर्धन-धरैया अनेक रूप-धारी कृष्ण,
देवकी-वसुदेव के सपूत जन्मे, यशोदा-नंद के घर पले श्री कृष्ण।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

Leave a Reply