कविता

मानव में मानवता

विधा- कविता
शीर्षक- मानव में मानवता

जाने क्यों अक्सर लोग कहते हैं,
आजकल मानव में मानवता न रही,
क्या खुद के अंदर एक बार झांककर,
सोच-समझकर उन्होंने ये बात है कही!

आज भी लोग निःस्वार्थ रक्तदान करते हैं,
बाढ़-सूखे में आतप्त लोगों की सहायता करते हैं,
कोई सिंगल प्लास्टिक का प्रयोग बंद न करे,
कुछ लोग मुद्दत से इसका अनुकरण करते हैं।

यह सच है कि लोग पीड़ित की सहायता न कर,
अक्सर रील-वीडियो ही बनाया करते हैं,
लेकिन कुछ लोग उन्हें अस्पताल पहुंचाते हैं,
जरूरत पड़ने पर रक्तदान और खर्च भी करते हैं।

जाने क्यों लोग सिर्फ नकारात्मक सोचते हैं,
नकारात्मकता का ही प्रचार-प्रसार करते हैं,
ऐसा करना आसान और रोचक भले ही हो,
कुछ मानव मानवता की जीवन मिसाल होते हैं।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244