कविता

मत रोको बेटी की उड़ान

विधा- भाव गीत
शीर्षक- मत रोको बेटी की उड़ान

मत रोको बेटी की उड़ान,
छू लेने दो उसको आसमान,
सूरज बन उजियारा करेगी,
बेटी से है घर का मान-सम्मान।

खोलने दो उसको भी पंख,
खुलकर जीने दो उसको,
बनाने दो उसे अपनी पहचान,
अनुभव के घूंट पीने दो उसको।

कोमल-सी है, पर कमजोर नहीं,
उसके सपनों को लेने दो उड़ान,
समर्थ है वह, उसे कोई रोक न पाए,
खुद में समेटे है एक नया जहान।

खुशियों भरी जिंदगी रहे उसकी,
करने दो उसे पूरे अपने अरमान,
कर जाएगी कुछ ऐसा वो भी,
शिखर पर रहे उसका स्वाभिमान।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244