मत रोको बेटी की उड़ान
विधा- भाव गीत
शीर्षक- मत रोको बेटी की उड़ान
मत रोको बेटी की उड़ान,
छू लेने दो उसको आसमान,
सूरज बन उजियारा करेगी,
बेटी से है घर का मान-सम्मान।
खोलने दो उसको भी पंख,
खुलकर जीने दो उसको,
बनाने दो उसे अपनी पहचान,
अनुभव के घूंट पीने दो उसको।
कोमल-सी है, पर कमजोर नहीं,
उसके सपनों को लेने दो उड़ान,
समर्थ है वह, उसे कोई रोक न पाए,
खुद में समेटे है एक नया जहान।
खुशियों भरी जिंदगी रहे उसकी,
करने दो उसे पूरे अपने अरमान,
कर जाएगी कुछ ऐसा वो भी,
शिखर पर रहे उसका स्वाभिमान।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
