गीतिका/ग़ज़ल

क्या करेगी दिल्लगी

इश्क चाहतहीन होगा क्या करेगी दिल्लगी,
जुर्म ये संगीन होगा क्या करेगी दिल्लगी।
रोज प्रेमी प्रेमिका साथी बदल लेते यहां,
मन हवस में लीन होगा क्या करेगी दिल्लगी।
इश्क करने का यहां पुरजोर फैसन चल रहा,
इश्क जब रंगीन होगा क्या करेगी दिल्लगी।
ओढ़कर अश्लील चादर इश्क करने चल दिए,
इश्क पर्दा हीन होगा क्या करेगी दिल्लगी।
इश्क में पैंतीस टुकड़े कोई करता है यहां,
जानकर मन हीन होगा क्या करेगी दिल्लगी।
इश्क में मारा सनम को भर दिया है ड्राम में,
मन वचन से हीन होगा क्या करेगी दिल्लगी।
इश्क करने के लिए मजहब नहीं होते कहीं,
इश्क का जब दीन होगा क्या करेगी दिल्लगी।

— प्रदीप शर्मा

प्रदीप शर्मा

आगरा, उत्तर प्रदेश

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