स्वास्थ्य

हरी मिर्च

हरी मिर्च अपने तीखे स्वाद के कारण भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाली एक आम सब्जी है। इसका तीखापन कैप्साइसिन नामक रसायन के कारण होता है। तीखा स्वाद देने के अलावा, कैप्साइसिन हृदय, पेट और दर्द से राहत दिलाने में भी सहायक होता है। हरी मिर्च दुनिया भर में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले मसालों में से एक है। हरी मिर्च की उत्पत्ति अमेरिका में हुई और यह अफ्रीका, एशिया और भूमध्यसागरीय क्षेत्र में व्यापक रूप से उगाई जाती है। हरी मिर्च कई पोषक तत्वों का समृद्ध स्रोत है। इसमें मौजूद जैव-सक्रिय यौगिकों में एल्कलॉइड, फ्लेवोनोइड, फेनोलिक, आवश्यक तेल, टैनिन, स्टेरॉयड और कैप्साइसिन शामिल हैं।
सीमित मात्रा में हरी मिर्च का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होता है, क्योंकि इसमें कैप्सैसिन, विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। भारतीय घरों में हरी मिर्च का उपयोग इसके तीखे और मसालेदार स्वाद के लिए और सलाद और सूप जैसे खाद्य पदार्थों और व्यंजनों में स्वाद जोड़ने के लिए किया जाता है। इसका अचार भी बनाया जाता है।

हरी मिर्च का सेवन करने से निम्नलिखित लाभ होते हैं-

  1. यह पेट में पाचक रस और लार के उत्पादन को बढ़ाता है, जिससे भोजन का पाचन अच्छी तरह होता है।
  2. इसमें मौजूद फाइबर मलविसर्जन क्रिया को सुचारू रखता है और कब्ज से बचाता है।
  3. हरी मिर्च में मौजूद कैप्सैसिन चयापचय को तेज करता है, जिससे शरीर में फालतू चर्बी एकत्र नहीं हो पाती।
  4. यह शरीर के तापमान को बढ़ाकर फैट और कैलरी को तेजी से जलाने में मदद करती है। इससे मोटापा घटता है।
  5. यह शरीर में मौजूद खराब कोलेस्ट्रॉल (स्क्स्) को कम करने में सहायक है।
  6. यह रक्त के थक्कों को रोकने और रक्त संचार को सुधारने का काम करती है।
  7. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को बढ़ाता है जिससे मौसमी बीमारियां दूर रहती हैं।
  8. यह त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद करता है।

हरी मिर्च का सेवन कई रूपों में किया जा सकता है, जैसे- सब्जी, दाल आदि में डालकर, अचार बनाकर या कच्ची ही सलाद के रूप में। इनमें सबसे अच्छा इसे कच्चा ही सलाद के रूप में खाने में है। लेकिन यह तीखी बहुत होती है, इसलिए अन्य सलाद की तरह अकेले नहीं खायी जा सकती। इस कारण इसे छोटे-छोटे टुकड़े करके एक-एक ग्रास के साथ खाया जाता है।

हरी मिर्च का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। एक वयस्क व्यक्ति के लिए प्रतिदिन एक या दो सामान्य आकार की हरी मिर्च का सेवन करना पर्याप्त है। हरी मिर्च को बच्चों की पहुँच से दूर रखना चाहिए। अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से निम्नलिखित दुष्प्रभाव हो सकते हैं-

  1. हरी मिर्च आंखों और त्वचा में जलन पैदा कर सकती है और त्वचा लाल हो सकती है ।
  2. हरी मिर्च चबाने से जीभ और मुंह में जलन हो सकती है, जो ज्यादातर हानिरहित होती है।
  3. कभी-कभी हरी मिर्च अधिक तीखी होने पर मूत्रांग में जलन हो सकती है। पर इसका निराकरण पर्याप्त मात्रा में नियमित जल पीने से हो जाता है।
  4. कम मात्रा में हरी मिर्च पेट आदि के लिए लाभदायक है, परन्तु अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट, लीवर और किडनी को हानि हो सकती है।

मैं प्रतिदिन दोपहर के भोजन के साथ एक और रात्रि भोजन के साथ भी एक कच्ची हरी मिर्च खाता हूँ। प्रारम्भ में मुझे यह बहुत तीखी लगती थी, परन्तु अब उतनी तीखी नहीं लगती।

डॉ. विजय कुमार सिंघल

नाम - डाॅ विजय कुमार सिंघल ‘अंजान’ जन्म तिथि - 27 अक्तूबर, 1959 जन्म स्थान - गाँव - दघेंटा, विकास खंड - बल्देव, जिला - मथुरा (उ.प्र.) पिता - स्व. श्री छेदा लाल अग्रवाल माता - स्व. श्रीमती शीला देवी पितामह - स्व. श्री चिन्तामणि जी सिंघल ज्येष्ठ पितामह - स्व. स्वामी शंकरानन्द सरस्वती जी महाराज शिक्षा - एम.स्टेट., एम.फिल. (कम्प्यूटर विज्ञान), सीएआईआईबी पुरस्कार - जापान के एक सरकारी संस्थान द्वारा कम्प्यूटरीकरण विषय पर आयोजित विश्व-स्तरीय निबंध प्रतियोगिता में विजयी होने पर पुरस्कार ग्रहण करने हेतु जापान यात्रा, जहाँ गोल्ड कप द्वारा सम्मानित। इसके अतिरिक्त अनेक निबंध प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत। आजीविका - इलाहाबाद बैंक, डीआरएस, मंडलीय कार्यालय, लखनऊ में मुख्य प्रबंधक (सूचना प्रौद्योगिकी) के पद से अवकाशप्राप्त। लेखन - कम्प्यूटर से सम्बंधित विषयों पर 80 पुस्तकें लिखित, जिनमें से 75 प्रकाशित। अन्य प्रकाशित पुस्तकें- वैदिक गीता, सरस भजन संग्रह, स्वास्थ्य रहस्य। अनेक लेख, कविताएँ, कहानियाँ, व्यंग्य, कार्टून आदि यत्र-तत्र प्रकाशित। महाभारत पर आधारित लघु उपन्यास ‘शान्तिदूत’ वेबसाइट पर प्रकाशित। आत्मकथा - प्रथम भाग (मुर्गे की तीसरी टाँग), द्वितीय भाग (दो नम्बर का आदमी) एवं तृतीय भाग (एक नजर पीछे की ओर) प्रकाशित। आत्मकथा का चतुर्थ भाग (महाशून्य की ओर) प्रकाशनाधीन। प्रकाशन- वेब पत्रिका ‘जय विजय’ मासिक का नियमित सम्पादन एवं प्रकाशन, वेबसाइट- www.jayvijay.co, ई-मेल: jayvijaymail@gmail.com, प्राकृतिक चिकित्सक एवं योगाचार्य सम्पर्क सूत्र - 15, सरयू विहार फेज 2, निकट बसन्त विहार, कमला नगर, आगरा-282005 (उप्र), मो. 9919997596, ई-मेल- vijayks@rediffmail.com, vijaysinghal27@gmail.com

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