शिव और सावन
शिव का सावन माह मनोहर।
हर जन-मन को लगता सुंदर।।
शिव जी के मन को ये भाए।
प्रकृति संग ये खूब सुहाए।।
सावन शिव जी को है प्यारा।
भक्त मानते आप सहारा।।
वन-उपवन हरियाली छाए।
कृषकों में खुशियां भर जाए।।
रिमझिम रिमझिम बरसे पानी।
सबकी अपनी राम कहानी।।
बच्चे कागज नाव चलाएँ।
बहन-बेटियाँ कजरी गाएँ।।
काँवड़िए जल भरकर लाएँ।
भोले बाबा को नहलाएँ।।
शिव शंकर के कर जयकारे।
कोशिश कर जाते शिव द्वारे।।
सुख-समृद्धि सावन में बरसे।
शिव पूजन कर जन-मन हरसे।।
शिव -सावन का मेल निराला।
औघड़ दानी भोला-भाला।।
सावन में शिव पूजन करना।
दर पर उनके माथा धरना।।
सावन शिव का सुंदर गहना।
हर प्राणी का ये है कहना।।
विनय सभी की शिव जी सुनते।
करुणा वारिश सब पर करते।।
शिव गौरा का गान जो करते।
खुशियों से झोली निज भरते।।
