पढ़ा लिखा मजदूर हुआ
करना था व्यापार मगर मैं जॉब में आकर अटक गया,
ज्यादा धन के लालच में, मै लक्ष्य से अपने भटक गया।
प्यार व्यार में पड़कर मैंने कर ली अपनी बरबादी,
पता चला जब पापा को, झट-पट से शादी करवादी।
अंबानी बनने का सपना मेरा चकनाचूर हुआ,
बीवी बच्चों की खातिर मैं पढ़ा लिखा मजदूर हुआ।
प्यार और व्यापार में पहले सहनी पड़ती हानि है,
दोनों ही हासिल नहीं हुए बस मन में यही ग्लानि है।
पत्नी और बॉस दोनों ही, मुझको ज्ञान सिखाते हैं,
देर अगर हो जाए तो, दोनों ही ऑंख दिखाते हैं।
पत्नी बच्चों की खातिर सपनों का सौदा रोज़ हुआ,
चंद ख्वाहिशों के चलते, मैं तला हुआ मोमोज हुआ।
