रोला छंद
मिले अगर अनुदान, समय से तब सुखदायक।
वरना है बेकार, लगे जैसे खलनायक।।
कहें मित्र यमराज, कभी ये पड़ता भारी-
एकमात्र उम्मीद, सिर्फ़ सबके रघुनायक।।१९१
हम तो हैं लाचार, क्योंकि छत टपकती है।
जिंदगी की आस, नित आँसू बहाती है।।
कहें मित्र यमराज, प्रभो ये कैसी लीला।
क्यों होता है रोज, हमारा आटा गीला।।१९२
सुनिए भोलेनाथ, हमारी करुण कहानी।
अज्ञानी नादान, मानकर औघड़ दानी।।
आया श्रावण मास, भक्त उत्साहित सारे।
करते पूजा-पाठ, आप जन-मन के प्यारे।।१९३
आपस में टकराव, मित्रता हो दुखदाई।
ऐसा मत कर यार, दुखी होगी परछाईं।।
कहें मित्र यमराज, नहीं अच्छा यह कारक।
मत संबंध विछेद, मित्र द्वय बनिए धारक।।१९४
अपना आज सुधार, कीजिए मेरे यारो।
तब फिर हमको आप, भले ही ताना मारो।।
कहें मित्र यमराज, देखना तब तुम सपना।
करिए अभी विचार, भला है किसमें अपना।।१९५
सावन में चहुॅंओर, धरा हँसती मुस्काती।
हरियाली परिधान, लगे सुंदर सी पाती।
धरा दिखे बहु मुदित, सुखद अहसास जगाए।
आलिंगन कर प्रकृति, खुशी से नहीं समाए।।१९६
जीवन का आधार, नहीं होता है सस्ता।
मान रहे हम आप, यही खुशियों का बस्ता।।
कहें मित्र यमराज, इसे जो नहीं समझता।
कदम-कदम पर रोज, उसी का बाजा बजता।।१९७
रहना दूर कुसंग, बात मेरी भी मानो।
कर मत पश्चाताप, हमें मूरख ही जानो।।
कहें मित्र यमराज, बनो मत इतना ज्ञानी।
हमको भी है बोध, आप कितना अभिमानी।।१९८
पूरी हुई न चाह, हमें कोई समझाए।
मानूँ क्या मैं हार, यही हमको बतलाए।।
कहें मित्र यमराज, लगन क्या रही अधूरी।
जिस कारण से चाह, हमारी हुई न पूरी।।१९९
आये हम संसार, काम कुछ ऐसा करना।
मिले मान-सम्मान, भला क्या हमसे डरना।
कहें मित्र यमराज, राह हम ऐसी पाये।
मानवता के काम, हमेशा वो तो आये।।२००
करिए आप विचार, कर्म कैसा हैं करते।
ऊपर है मुस्कान, छिपाए सच से डरते।।
कहें मित्र यमराज, भला ऐसे क्या जीना।
और बिना ही चाह, जहर पड़ता है पीना।।२०१
भारत गौरव गान, सदा कर्तव्य हमारा।
हमको अपना देश, सदा प्राणों से प्यारा।।
नहीं घटाएं मान, काम सब ऐसा करना।
हो क्यों पश्चाताप, पड़े जो हमको डरना।।२०२
भारत गौरव गान, आपको पड़ता भारी।
या फिर मन की चाह, करें इससे गद्दारी।।
सोचो समझो आज, चाल उल्टी पड़ सकती।
तब होगी बेकार, दिखाते तुम जो हस्ती।।२०३
सृजित तूलिका संग, लिखी है रंग कहानी।
जितना मुझको ज्ञान, रचा है आप जुबानी।।
कहें मित्र यमराज, पंख लगे अब मेरे।
हुआ लेखनी रोग, शब्द रहते हैं घेरे।।२०४
सृजित तूलिका संग, रंग कागज पर उतरे।
बहती नदिया भाव, सरीखे कुशल चितेरे।।
सपनों की है नाव, बहे जैसे हो स्याही।
करने आई आज, शब्द की बड़ी उगाही।।२०५
तुमसे बढ़कर कौन, प्रश्न है इतना भारी।
कभी न किया विचार, नहीं कोई तैयारी।।
कहें मित्र यमराज, व्यर्थ हमको उलझाना।
चलो चलें अब यार, संग में खाएँ खाना।।२०६
हम सब मद में चूर, व्यर्थ हमको समझाना।
भेदभाव से दूर, झूठ का ताना-बाना।।
कहें मित्र यमराज, तमाशा करते जितना।
इतनी कोशिश बाद, अभी करना है कितना।।२०७
भेदभाव से दूर, नहीं जब हम रह पाते।
फिर भी नाहक लोग, खूब हमको समझाते।।
कहें मित्र यमराज, बोझ तू खुद पर भारी।
होता है अफसोस, हमारी तुझसे यारी।।२०७
उलझन सबकी एक, सभी मिलकर हैं रोते।
सूत्रधार भी आप, मुँह दिनभर निज धोते।।
कहें मित्र यमराज, करें नाहक ही अनबन।
केवल चाहें आज, दूर हो मेरी उलझन।।२०८
कैसी हो सरकार, समस्या इतनी भारी।
लेना मत तुम नाम, मिलेगी कच्ची गारी।।
कहें मित्र यमराज, माथ अपना मत पीटो।
दिए आप अधिकार, दिखाया पावर वीटो।।२०९
भूली बिसरी बात, सदा पड़ती कब भारी।
कर लें यदि हम आप, प्रेम से इससे यारी।।
कहें मित्र यमराज, यही जीवन का हिस्सा।
सबके हैं जज़्बात, सुनाते अपना किस्सा।।२१०
सारा जग खुशहाल, आरजू है बस इतनी।
नहीं और की चाह, लालसा करना कितनी।।
कहें मित्र यमराज, सभी दें साथ हमारा।
दुनिया होगी धाम, हर्ष चहुँदिश में सारा।।२११
प्रेम जगत का सार, कौन अब इसको माने।
सभी बड़े विद्वान, लगे खुद को बतलाने।।
कहें मित्र यमराज, व्यर्थ है इसकी चर्चा।
किसका चलता आज, प्रेम से यारों खर्चा।।२१२
कुदरत का संकेत, समझना बहुत जरूरी।
रहना क्यों है दूर, बताओ तो मजबूरी।।
कहें मित्र यमराज, कह़ो मत इसको जहमत।
शुभचिंतक लो मान, हमारा प्यारा कुदरत।।२१३
करिए उनको याद, दिलाए जो आजादी।
करके निज बलिदान, व्यर्थ बनते फरियादी।।
कहें मित्र यमराज, सरल क्या ये था इतना।
सहकर ढेरों कष्ट, सोचना मुश्किल जितना।।२१४
लिए तिरंगा हाथ, जश्न हम आप मनाते।
है इतना उत्साह, कथा विकास की गाते।।
कहें मित्र यमराज, भाल भारत का होगा।
आजादी को लोग, नहीं समझें यदि रोगा।।२१५
बोल बड़े अनमोल, कौन ये बातें कहता।
सब अपनी ही राह, भले कुछ कितना सहता।।
कहें मित्र यमराज, रही गिर इसकी गरिमा।
निज हित के अनुरूप, सभी गाते हैं महिमा।।२१६
चलो वक्त के संग, भला इसमें क्या खोना।
पहले जैसा बीज, आज भी प्यारे बोना।।
कहें मित्र यमराज, साथ तुम इसका देना।
तब खाओगे रोज, बिना चिंता के छेना।।२१७
परनिंदा से दूर, आप सबका हित होगा।
मन को बड़ा सुकून, मुफ्त लेते क्यों रोगा।।
कहें मित्र यमराज, मुफ्त का माला पहनो।
देता नेक सलाह, सभी ये भाई बहनों।।२१८
मानवता का पाठ, याद हमको है रखना।
जीवन सुख का स्वाद, सदा ही रहना चखना।।
कहें मित्र यमराज, दाम इसमें क्या लगता।
भाईचारा प्यार, बीच हम सबके बढ़ता।।२१९
अपनों के ही बीच, छुपा दुश्मन जब बैठा।
देखें रहे हैं लोग, हमेशा रहता ऐंठा।।
कहें मित्र यमराज, होश में अब तो आओ।
या फिर कर श्रृंगार, बैठ घर शोक मनाओ।।२२०
दुनिया देखे आज, अजब है राम कहानी।
टूटे नहीं गुमान, भले मर जाएँ नानी।।
मुश्किल इनकी आज, बुद्धि पर काली छाया।
लोग हो रहे दूर, कौन अब समझे भाया।।२२०
पढ़ा-लिखा जो है युवा, चाह रहा है काम।
पर बेचारा रट रहा, मजबूरी का नाम।।
देख रहा है रोज ही, पेपर होता लीक।
मेहनत करता खूब वो, सोचे सब कुछ ठीक।।२२१
सबसे रखना मेल, इसे मत समझो बाधा।
हर मुश्किल आसान, मानिए पहले आधा।।
कहें मित्र यमराज, बात है सीधी सच्ची।
मूरख हैं जो लोग, खेलते गोली कच्ची।।२२२
बिगड़े बोल जनाब, सोचिए कल क्या होगा।
पूछो जाकर आप, भला जो जिसने भोगा।।
कहें मित्र यमराज, भूल पड़ जाय न भारी।
नहीं हुई है देर, अभी रोको बीमारी।।२२३
कैसे भरें उड़ान, प्रश्न क्या इतना भारी।
इसीलिए क्या आप, नहीं करते तैयारी।।
कहें मित्र यमराज, आप ही राह बताओ।
या फिर अपना आप, बैठ सुर-ताल मिलाओ।।२२४
मौसम के अनुसार, नजरिया अपना रखिए।।
व्यर्थ नहीं तकरार, स्वाद खुशियों का चखिए।।
कहें मित्र यमराज, रहें यदि हम सब भी नम।
करता है सम्मान, हमारा जो भी मौसम।।२२५
आज कौन करीब, बनाकर रखते दूरी।
सहता मार गरीब, मान अपनी मजबूरी।।
कहें मित्र यमराज, दोष दें भी तो किसका।
किस्मत खेले खेल, गरीबी तीखा सिरका।।२२६
राखी बंधन प्यार, प्रेम का सुंदर गहना।
भगिनी हो या भ्रात, सभी का इतना कहना।।
कहें मित्र यमराज, पर्व की महिमा न्यारी।
बाँधे रक्षा सूत्र, बहन सबकी है प्यारी।।२२७
रहना मस्ती चूर, दंभ तुम इतना पालो।
घाव बने नासूर, बैठ तुम उसको पालो।।
कहें मित्र यमराज, ज्ञान निज ऊपर रखना।
चाहे जितना दर्द, आप बस हँसते रहना।।२२८
भूल गया नादान, आज सारी मर्यादा।
बना घूमता आज, मजे में दूजा प्यादा।।
कहें मित्र यमराज, चली आई बीमारी।
भूखे नंगे लोग, बने घूमें अधिकारी।।२२९
