कहानी

कहानी – पैसे का खेल

लुधियाना से चंडीगढ़ जाती  मुख्य सड़क पर एक भीषण दुर्घटना हो गई, एक तेज रफ्तार बस ने एक साइकिल सवार को कुचल दिया था । पल भर में ही वहां भीड़ इक्कठी हो गई, लोग बस चालक को मारने पर उतारू हो गए, बस के शीशे तोड़ने लगे, तभी पास के नाके से पुलिस पहुंच गई और ड्राइवर को गिरफ्तार करके पुलिस थाने ले गई। पुलिस ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी, मुकदमा चला,बस सर्विस वाले मालिकों ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए इतना झूठ कह दिया था, कि यह ड्राइवर नशे का  आदी था और कई बार उसे इस बात के लिए  चेतावनी जा चुकी थी , और ड्राइवर को 5 साल की सजा हो गई।

जब भी सड़क के ऊपर कोई दुर्घटना होती है जहां एक बड़ी गाड़ी और एक छोटी सवारी हो, तो हमेशा कसूर बड़ी गाड़ी वाले का नहीं माना जाता है। हकीकत क्या है ,गलती किसकी है एक्सीडेंट क्यों हुआ, कैसे हुआ,इसकी जानकारी कोई लेना नहीं चाहता, बस जो गरीब है वह मर गया, सब हितैषी बन गए और जो बस ड्राइवर जिसने उसे कुचला है वह सजा याफ़्ता हो गया।

अब यहां पर हकीकत कुछ और है, मरने वाले का नाम बनवारी लाल था ,वह किसी कंपनी में सुपरवाइजर की नौकरी करता था और रोज सुबह साइकिल पर अपने घर से ,जो की तंग गली में था, अपने काम पर जाता था। दुर्घटना वाले दिन भी वह सुबह साइकिल से काम के लिए निकला, जेब में मोबाइल रखा, मोबाइल से ईयरफोन  दोनों कानों में लगा कर और गाने सुनते हुए बड़ी मस्ती से साइकिल चला रहा था। अपनी सकरी गली से जब वह मुख्य सड़क की तरफ आया तो ना तो उसने दाहिने देखा, ना बाएं देखा, कान में लगी ईयरफोन की वजह से उसे और कुछ सुनाई भी नहीं पड़ रहा था। अचानक मुख्य सड़क पर आने से वह सामने से सामान्य गति से आती हुई एक बस से टकरा गया और बस के नीचे आ गया।

बस वाला शरीफ था, वह बस को तेज रफ्तार से भगा कर भी ले जा सकता था, लेकिन वह उतरा यह देखने के लिए की क्या हुआ है ,तब उसे पता चला कि बस के  नीचे एक आदमी कुचला  गया है। इतने में भीड़ इकट्ठी हो गई थी और ड्राइवर को पुलिस  पकड़ के ले गई। यहां शत प्रतिशत गलती साइकिल सवार की है, बस ड्राइवर बिल्कुल बेकसूर है, लेकिन क्योंकि बस बड़ी गाड़ी थी इसलिए कसूर उसी का है माना जाता है, और उसे ही सजा हो गई,  यह कहां का इंसाफ है।

इस घटना के कुछ दिन बाद ही एक और घटना हो गई ,दिल्ली के एक बड़े व्यापारी ने अपने बेटे को 40 लाख की एक नई गाड़ी खरीद कर दी, यारों दोस्तों ने पार्टी की और खूब खा पी कर शोर मचाते हुए गाने सुनते हुए, तेज रफ्तार से वह गाड़ी पर हरकते कर रहे थे। अपनी सिर्फ ड्यूटी खत्म करके एक मजदूर साइकिल पर जा रहा था , रात लगभग 10:00 का समय था, उसको उनकी गाड़ी ने ठोक कर  मारा,  टकरा के  मजदूर उछलकर बहुत दूर जा गिरा ,साइकिल चकनाचूर हो गई। 

सड़क किनारे एक चाय बेचने वाले ने गाड़ी का नंबर नोट कर लिया था, और 100 नंबर पर पुलिस को सूचना देकर नंबर लिखवा दिया ,थोड़ी देर बाद पुलिस वहां पहुंच गई। इस नंबर के आधार पर गाड़ी के मालिक का पता लग गया, लेकिन फिर क्या हुआ, उस चाय वाले दुकानदार को जिसने नंबर दिया था जान से मारने की धमकियां मिलने लगी, और अंत में उसने यह बयान दिया कि वह अंधेरे में ठीक से देख नही पाया , हो सकता है कि यह नंबर गलत हो ।ना फिर केस चला, और पैसे के दम पर सब कुछ रफा दफा हो गया, उस मजदूर की आज तक किसी ने खबर नहीं ली ,सुनने में आया है कि उसके दोनों पैरों की हड्डियां टूट गई थी और वह 6 महीने अस्पताल में रहा। ऐसा भी होता है।

— जय प्रकाश भाटिया

जय प्रकाश भाटिया

जय प्रकाश भाटिया जन्म दिन --१४/२/१९४९, टेक्सटाइल इंजीनियर , प्राइवेट कम्पनी में जनरल मेनेजर मो. 9855022670, 9855047845

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