नई भोर का गीत
पतझड़ चाहे छीन ले, पत्तों का संसार।
फिर हर डाली पर खिले, नवजीवन के हार॥
सूनी राहें देखकर, मन मत करो उदास।
काँटों की इस राह पर, फूलों की भी आस॥
टूटे सपनों को मिले, फिर से नव-आकाश।
हिम्मत जिसके साथ हो, पूरी हो हर आस॥
बादल चाहे घेर लें, छिप जाए दिनमान।
थोड़ा धीरज रख जरा, फिर खिले आसमान॥
सूखी धरती पर कभी, बरसे सावन-धार।
बंजर मन में भी खिले, आशाओं के हार॥
जीवन में सुख-दुख सदा, आते-जाते साथ।
धीरज रखकर जो चले, मंजिल देती हाथ॥
गिरना कोई हार नहीं, समझ ये इम्तिहान।
ठोकर खाकर फिर उठो, यही जीत का गान॥
बीते कल को छोड़कर, देखो नया विहान।
जो खोया वह सीख है, आगे नई उड़ान॥
राह कठिन हो तो कभी, छोड़ो मत विश्वास।
अंधियारा जितना घना, उतना निकट प्रकाश॥
नई भोर का गीत है, मन में रख विश्वास।
पतझड़ के हर अंत में, जन्मे है मधुमास॥
— डॉ. सत्यवान सौरभ
