कविता

भारत माता की गोद में यमराज

सुबह सुबह मित्र यमराज ने फोन कर कहा
प्रभु ! आप मेरा एक काम कर दीजिए
अपनी भारत माता को मेरा प्रणाम बोल दीजिए।
चौंकते हुए मैंने पूछा – मगर क्यों?
बंदा भड़क गया – यार लगता है धरती पर
तू ही मेरा सबसे बड़ा दुश्मन है,
जो इतने सवाल करता है
या फिर पूरी तरह मानव रुपी गधा है।
सुन! मुझे भी भारत माँ की गोद में आना है,
तुझे तो बस मेरा प्रणाम उन तक पहुँचाना है।
उसकी बात सुन मैं मुस्कुराया
इसके लिए तो तू कहीं और भी तो
जन्म ले सकता है भाया।
इतना सुनते यमराज गुर्राया –
फिलहाल अब तू चुपचाप मेरा प्रणाम
और मेरा संदेश माता तक पहुँचा दे,
ज्यादा नखरे दिखाया तो धरती माता से
नमक मिर्च लगाकर तेरी शिकायत कर दूँगा,
कुछ भी हो जाए अब तो मैं भारत माता की गोद में ही
नवजीवन की सगर्व शुरुआत करुँगा,
तेरे साथ लड़ने झगड़ने का सुख भी
इसी बहाने से खूब लेता रहूँगा।

— सुधीर श्रीवास्तव

*सुधीर श्रीवास्तव

शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921

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