गीत/नवगीत

उठो सफलता खड़ी सामने

उठो सफलता खड़ी सामने, मंजिल को अब पाना है।
सागर हो कितना भी गहरा, मोती चुन के लाना है।
गिरें नहीं बस हिम्मत रखना, कर टुकड़े तूफानों के।
रौंद चले हम शूल राह के, चाव लिए अरमानों के।
बांध लक्ष्य अरि मार गिराएं, अपना चूक निशाना है।
उठो सफलता खड़ी सामने, मंजिल को अब पाना है।
बड़े कदम यह नहीं रुकेगा, बढ़ना हम को आगे है।
हो जनून जब मन के भीतर, देख कष्ट भी भागे है।
मुश्किल की है बेशक बेला, नहीं हमें घबराना है।
उठो सफलता खड़ी सामने, मंजिल को अब पाना है।
बांध कफ़न हम निकले घर से, नहीं मौत से डरना है।
जो सोचा है मन में हमने, सपना पूरा करना है।
मेहनत का फल मीठा होता, आज वही तो खाना है।
उठो सफलता खड़ी सामने, मंजिल को अब पाना है।

— शिव सन्याल

*शिव सन्याल

नाम :- शिव सन्याल (शिव राज सन्याल) जन्म तिथि:- 2/4/1956 माता का नाम :-श्रीमती वीरो देवी पिता का नाम:- श्री राम पाल सन्याल स्थान:- राम निवास मकड़ाहन डा.मकड़ाहन तह.ज्वाली जिला कांगड़ा (हि.प्र) 176023 शिक्षा:- इंजीनियरिंग में डिप्लोमा लोक निर्माण विभाग में सेवाएं दे कर सहायक अभियन्ता के पद से रिटायर्ड। प्रस्तुति:- दो काव्य संग्रह प्रकाशित 1) मन तरंग 2)बोल राम राम रे . 3)बज़्म-ए-हिन्द सांझा काव्य संग्रह संपादक आदरणीय निर्मेश त्यागी जी प्रकाशक वर्तमान अंकुर बी-92 सेक्टर-6-नोएडा।हिन्दी और पहाड़ी में अनेक पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। Email:. Sanyalshivraj@gmail.com M.no. 9418063995