उठो सफलता खड़ी सामने
उठो सफलता खड़ी सामने, मंजिल को अब पाना है।
सागर हो कितना भी गहरा, मोती चुन के लाना है।
गिरें नहीं बस हिम्मत रखना, कर टुकड़े तूफानों के।
रौंद चले हम शूल राह के, चाव लिए अरमानों के।
बांध लक्ष्य अरि मार गिराएं, अपना चूक निशाना है।
उठो सफलता खड़ी सामने, मंजिल को अब पाना है।
बड़े कदम यह नहीं रुकेगा, बढ़ना हम को आगे है।
हो जनून जब मन के भीतर, देख कष्ट भी भागे है।
मुश्किल की है बेशक बेला, नहीं हमें घबराना है।
उठो सफलता खड़ी सामने, मंजिल को अब पाना है।
बांध कफ़न हम निकले घर से, नहीं मौत से डरना है।
जो सोचा है मन में हमने, सपना पूरा करना है।
मेहनत का फल मीठा होता, आज वही तो खाना है।
उठो सफलता खड़ी सामने, मंजिल को अब पाना है।
— शिव सन्याल
