कविता

आसान नहीं नास्तिक होना

आसान नहीं नास्तिक होना,
भीड़ से अलग राह पर चलना,
अंधेरे में दीया बनकर जलना,
न ईश्वर का खौफ,न अल्लाह का डर,
न जिन्न भूत की बातों का असर,
हर इंसान में बस इंसान दिखे,
न जाति का भेद,न धर्म की दीवारें उठें,
पाखंड पर पैसा हम व्यर्थ नहीं करते,
ढोंगी बाबाओं के आगे शीश नहीं धरते,
बिल्ली काटे रास्ता,या कोई टोटका हो,
सवाल उठाने की हिम्मत है,
चाहे कितना भी टोकना हो,
न स्वर्ग की लालसा,न नर्क का है त्रास,
स्वतंत्र दिमाग में बस ज्ञान का प्रकाश,
हर जीव से प्रेम,कोई भेदभाव नहीं,
मल-मूत्र को पावन कहने का कोई भाव नहीं,
मुहूर्त का न इंतजार,हर पल ही शुभ है,
न राशिफल की चिंता,न अंकों का भ्रम है,
खुशी मनाने को त्योहारों की बंदिशें नहीं,
जाति,लिंग,रंग की यहां कोई रंजिशें नहीं,
अपनी मेहनत का क्रेडिट खुद को ही देते हैं,
आने वाली पीढ़ी को अंधश्रद्धा से बचा लेते हैं,
धार्मिक भगदड़ के खतरों से हम दूर खड़े,
कर्म ही पूजा है,इसी सोच के साथ बढ़े,
नदियों को माता कह गंदा नहीं करते,
व्रत उपवास की मजबूरी में भूखे नहीं मरते,
दिखावे के दान से बेहतर,जरूरतमंद की इमदाद,
मानसिक गुलामी से परे, सोच हमारी आजाद,
शनि मंगल का डर नहीं,विज्ञान पे विश्वास है,
खेतों में अन्न उपजाते किसान पे विश्वास है,
वैज्ञानिक दृष्टिकोण,संविधान को सर्वोपरि मानते हैं,
हम सच को जांचकर,हकीकत को जानते हैं,
हां,आसान नहीं नास्तिक होना,
रूढ़ियों को छोड़कर,तार्किकता में जीना।

— राजेन्द्र लाहिरी

राजेन्द्र लाहिरी

पामगढ़, जिला जांजगीर चाम्पा, छ. ग.495554

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