क्षणिका

क्षणिकाएं : शब्द श्रंखला -रोशनी

१)
अन्तर्मन यदि दैदीप्यमान है
बाहरी अंधकार से क्यों कोई डरे
विजय श्री आपकी सुनिश्चित है
कर्तव्य पथ पर बेखौफ आगे बढ़ें ।

२)
खुलेंगे सभी सफलता के द्वार
और मिट जाएगा सारा अन्धकार
सूरज ढल भी गया तो क्या
चन्द्रमा की रोशनी तो है बरकरार।

३)
करवा चौथ का यह पावन पर्व
सबके घर-आंगन में खुशियां लाए
सूर्य देव के अस्त होने के बाद
चन्द्रमा की रोशनी से धरा नहाए।

४)
जिनके पास न अधिक संसाधन
उनको भी हम साथ लेकर चलें
एक दिन जरूर पलटेगी किस्मत
सकारात्मक भाव मन में भरें।

५)
बस कुछ ही दिनों के बाद
आने वाला है दीपावली त्यौहार
निर्बल के घर में भी करना रोशनी
मां लक्ष्मी आपसे बस यही गुहार।

— नवल अग्रवाल

*नवल किशोर अग्रवाल

इलाहाबाद बैंक से अवकाश प्राप्त पलावा, मुम्बई

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