दीप की रोशनी
दीप जलता है खुद को जलाकर
रोशनी देता है सबको बिखेर।
खुद के अंधकार को दूर कर
दूसरों को रास्ता दिखलाकर।
किसी और को जलाकर खुशी नहीं
दीप तो खुद को जलाता है
रोशनी देकर सबको सुखी कर
दिल को सुकून दिलाता है।
आओ हम भी दीप की तरह जले
रोशनी दें सबको बिखेर कर।
दूसरों के जीवन में उजाला कर
सुख-शांति का मार्ग दिखलाएं कर।
दीप की रोशनी से सीख लें हम
खुद को जलाकर रोशन करें।
दूसरों के जीवन में उजाला भर
अपना जीवन सफल बनाएं कर।
— डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी
