गीतिका/ग़ज़ल

गजल

टूटा जो दिल तो दिल को दिलासा नहीं मिला.
राँझे को हीर, हीर को राँझा नहीं मिला.

सोचा जो दिल की कह दूँ तो हिम्मत नहीं हुई
हिम्मत हुई तो कहने का मौक़ा नहीं मिला.

इतने हैं रिश्तेदार कि मुश्किल शुमार है,
कहते हैं जिसको रिश्ता,वो रिश्ता नहीं मिला.

बिछुड़े हैं जबसे तुमसे हम ऐसे भटक गये,
जिस पर चले थे साथ वो रस्ता नहीं मिला.

अब भी अधूरे शेर सी लगती है ज़िंदगी,
तुम जैसा कोई दूसरा मिसरा नहीं मिला.

डॉ.कमलेश द्विवेदी
कानपुर
मो.09415474674

2 thoughts on “गजल

  • महातम मिश्र

    क्या बता क्या बात, बहुत खूब डा. कमाल द्विवेदी जी, कोई दूसरा मिसरा ना मिला, वाह आदरणीय वाह……

  • अब भी अधूरे शेर सी लगती है ज़िंदगी,
    तुम जैसा कोई दूसरा मिसरा नहीं मिला….Bahut Khub.

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