गीतिका/ग़ज़ल

मेरी पहली गज़ल : ले गए तुझे तो वो जिन्होंने तेरी कीमत चुकाई

ले गए तुझे तो वो, जिन्होंने तेरी कीमत चुकाई
हम तो बेमोल बिके, हमें न इश्क़-ए-एहतसाब समझ आई

तूने लूटा बेशक़, अपने ही खरीददारों को
मैंने जब फैलाई तेरे आगे ही, इश्क-ए-खैरात को हथेली फैलाई

लबालब रहा तेरा सियाहा, फिर भी रोनी सूरत बनाई
मैं देख कैसे तेरे लिए लुटी, फिर भी मुस्कुराई

न बुरा किया कभी, न करने ही दिया
चाहा अजल से जो भी हो, हो उसमें तेरी ही भलाई

क़द्रदानो की कीमत, का इल्म ही कहाँ है तुम्हें
तुमने तो जब भी की, की मेरी ही रुसवाई

खुद को बड़ा ही, बताया किया खुद्दार
ये कैसी खुद्दारी कि, आप ही आप की कीमत लगाई

बेजान, बेदिल से बुत, तुझे खरीद ले गए
धड़कता दिल लिए, मैं ही काफ़िर कहलाई

तुम डरा किए, फिकरों से, किस्सों से
मैं ज़माने भर की तोहमत, सर के ताज सा उठा लाई

माना की दर-ए-यार पे, सदा से हम गदा रहे
कैसा मालिक तू गोया, कि असबाब से लदकर भी किवाड़ लगाई

दिल का दांव लगाया भी तो किस पे, कि रूह तक गिरवी है
तुझे भी तो ऐ ‘रेणुका’, इश्क-ए-तिजारत कहाँ समझ आई

नीतू सिंह ‘रेणुका’

*नीतू सिंह

नाम नीतू सिंह ‘रेणुका’ जन्मतिथि 30 जून 1984 साहित्यिक उपलब्धि विश्व हिन्दी सचिवालय, मारिशस द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिन्दी कविता प्रतियोगिता 2011 में प्रथम पुरस्कार। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख, कहानी, कविता इत्यादि का प्रकाशन। प्रकाशित रचनाएं ‘मेरा गगन’ नामक काव्य संग्रह (प्रकाशन वर्ष -2013) ‘समुद्र की रेत’ नामक कहानी संग्रह(प्रकाशन वर्ष - 2016), 'मन का मनका फेर' नामक कहानी संग्रह (प्रकाशन वर्ष -2017) तथा 'क्योंकि मैं औरत हूँ?' नामक काव्य संग्रह (प्रकाशन वर्ष - 2018) तथा 'सात दिन की माँ तथा अन्य कहानियाँ' नामक कहानी संग्रह (प्रकाशन वर्ष - 2018) प्रकाशित। रूचि लिखना और पढ़ना ई-मेल n30061984@gmail.com