कहानी

सुरेखा

आज का दिन सुरेखा के लिए खास था।
और भला हो भी क्यो नही।क्योकि आज उसका मेडल से सम्मान जो होना था।और इस कारण वह परसन्न भी है।उसके बरसों का देखा सपना साकार हो गया था।देश की सेवा के लिए अपने आप को समर्पित करने वाली सुरेखा का आर्मी पुलिस में चयन हो गया था।
आज उसको अपनी शाला को छोड़े पूरे पांच साल हो गए।इंटर पास हुई और फिर कड़े संघर्षों का सिलसिला शुरू हो गया था।
सुरेखा अपने पुराने दिनों को याद करती है।कि कैसे उसने संघर्ष किया?और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफलता प्राप्त की।
जब वह बारहँवी कक्षा में अध्ययनरत थी तब वह सुबह पांच बजे उठकर अपने गायों और बकरियों को कैसे चराने जाया करती और फिर कैसे दौड़-दौड़ कर उनको लाया करती थी।
और इसी कारण वह स्कूल के प्रातःकालीन खेल-कूद अभ्यास में जा नही पाती थी।वह रोज देर से स्कूल पहुंचती और व्यायाम टीचर से रोज खरी-खोटी सुनती।
उसका टीचर कहता-
“ये क्या है सुरेखा?यही स्कूल आने का टाइम है?
उसका टीचर इतने में शांत नही होता।और आगे कहता-
“एक तो तुम खेल-कूद और दौड़ के अभ्यास में भाग नही लेती।ऊपर से देर से आती हो।”
“सुरेखा तुम या तो पढाई करो या फिर गायें बकरियाँ चराओ!!रेखा चुपचाप सुन लेती थी।
ठीक ऐसे ही दिनों जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगीता का आयोजन हुआ।उसी की तैयारी हेतु उसके टीचर को आज सुबह पांच बजे जल्दी स्कूल आना पड़ा।उसका टीचर गांव के सीमा से लगे गौठान ही पहुँचा था कि उसकी नजर अचानक सुरेखा पर पड़ गई।और वह  ठिठक गए।दंग रह गए।सुरेखा दौड़-दौड़ कर यहॉं-वहाँ भगने वाली मवेशियों को इकट्ठा कर रही थी।और वहीं दौड़ने का अभ्यास भी कर रही थी।
वह टीचर चुपचाप स्कूल पहुंच गया।नियत समय पर सभी बच्चे स्कूल आए।और प्रतियोगिता में शामिल होने का निर्देश दिया गया।सुरेखा ने भी उसमे शामिल होने की इच्छा जाहिर की।उसके टीचर ने बिना कुछ कहे शामिल कर लिया।
सुरेखा के खुशी का ठिकाना नही रहा।
सभी बच्चे उत्साह के साथ जिला के ग्राउंड में लंबी रेस के लिए खड़े हो गए।
तभी एक लंबी सिटी बजी फिर एक,,,!दो,,,!तीन,,,!
और कुछ ही पल में बच्चे उड़न छू हो गए।
लेकिन सुरेखा की गति धीमी दिख रही थी।
असल में उसे मवेशियों के झुंड दिखाई दे रहे थे।
तभी अचानक उसके टीचर की आवाज आती है-
सुरेखा!!सुरेखा !!कदम बढ़ाओ!!
सभी बच्चे आग निकल गए थे।और फिर क्या था इतना सुनते ही सुरेखा पवन वेग की भांति हवाओं को चीरती हुई तीर की भांति लक्ष्य को भेद गई।और जोर-जोर से आवाज आने लगी।
सुरेखा!सुरेखा!सुरेखा।
इस तरह से सुरेखा अव्वल आ जाती है।और खेल कोटे से उसका आर्मी पुलिस में चयन भी हो जाता है।आज वह अपने स्कूल का रोल मॉडल बन गई थी।और उसी का सम्मान हो रहा था।
— अशोक पटेल”आशु”

*अशोक पटेल 'आशु'

व्याख्याता-हिंदी मेघा धमतरी (छ ग) M-9827874578