कुण्डली/छंदमुक्तक/दोहा

भूषण छंद मुक्तक

भगीरथी गंगा भू पर, आई देखो रुमक-झुमक।

बधाइयां लो सकल सुजन, सुजला सुफला संरक्षक।।

जीवन दात्री का आँचल, डालो मत कूडा- करकट—

स्वच्छ रहे नदिया का जल, कर्म-धर्म जानो सार्थक।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८