रिमझिम बूंदें
चिलचिलाती धूप,
तेज गरमी से तप्त धरा पर,
गिरती हैं जब अंबर से रिमझिम बूंदे,
छेडती हैं मीठी सरगम,
सौंधी-सौंधी माटी की खुशबू,
महकते बाग-सी,
चहकते मन आँगन-सी।
लुभाती हैं गरम-गरम पकौडे,
गरमा गरम चाय की खुशबू,
आह्लादित करती मन,
बचपन की लोरी-सी मीठी,
माँ के आँचल सी ममतामयी,
प्रकृति खिल-खिल इतराती,
धरा बिछाती मखमली गलीचा,
नीलाभ नभ तानता वितान,
बादलों को ले लहराती पवन,
गाती गीत खुशी के,
बिजुरिया चमकती,
पायलिया खनकती,
सौंधी-सौंधी खुशबू,
मन हिंडोले लेता,
हुलार हिलोरते,
पुष्पित हिय महकने लगता।
सौंधी खुशबू से हो दीवाना,
मन मयूर झूमने लगता।
