कविता
एक देश, एक ही झंडा,
भाषाएं अनेक,अलग अलग नाम,
भाषाओं का न करें राजनितिकरण,
न करें भारत की एकता को बदनाम।
भाषा चाहे जो भी है , शब्दों की भावना नहीं है अलग,
जरूरत है एक होकर प्रज्वलित करें विश्व में अपने देश की अलख।
जबतक है मन में आपस में एक दूसरे के प्रति सम्मान और प्यार,
तब तक भाषा नहीं है कोई दीवार
याद रखें भाषाओं की नफरत पैदा करेगा देश में एक सिविल वार।
एक बनो,नेक बनो क्योंकि बंटने में देश होगा कमजोर,
मिलकर रहेंगे तभी हम दे पाएंगे दुश्मन को जवाब मुंहतोड़।
हम-सब हैं भारत माता के संतान,
एक होकर देश के विकास में दें अपना अपना योगदान।
जय हिन्द।भारत माता की जय।
— मृदुल शरण
