लघुकथा

बिन्नी चिप्स के 32 पैकेट!

समाचार जानने के लिए वह अखबार का जमाना था. मिन्नी ने एक दिन एक समाचार पढ़ा और एकदम शोर मचा दिया- “पापा जल्दी से एक फोन नं. मिलाइए और अपना नाम-पता बताकर बोलिए बिन्नी और जो नं. बोलें उसे ध्यान से सुनिएगा. आपको गिफ्ट मिलेगी.”
पापा ने किया, मम्मी ने किया, बिटिया ने किया, बेटे ने किया, तब तक उन्हें यह भी नहीं पता था, कि बिन्नी क्या है और गिफ्ट में क्या मिलेगा!
चारों को गिफ्ट मिलनी थी. बेटा बस में गया और एक घंटे में ऑटो स्कूटर से वापिस आ गया.
घर आकर एक पैक खोला, तो बिन्नी चिप्स के 8 पैकेट निकले. असल में उस दिन मार्केट में बिन्नी चिप्स लॉन्च किए जा रहे थे और विज्ञापन के लिए पहले 100 फोन करने वाले लोगों को वे पैक दिए जाने थे. बिन्नी चिप्स के 32 पैकेट! जो भी सुनता कहता- ये हुई न बात…..!
— लीला तिवानी

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244