हाय रोटी
रोटी की है यह सब करामात
रोटी कर्म कराती
रोटी ही जुल्म कराती
यह गोल गोल खुद
हमें गोल गोल घुमाती
किसी की प्लेट भरपूर
कोई आधी ही खा सो जाता
इसकी खातिर
गाँव छूटता
वतन छूटता
अपने जाते छूट
सारी उम्र गुजर जाती
इस रोटी के फेर में
फिर भी पेट न भरता
हर्ष इसमें
विषाद इसमें
बड़ी अजीब इस रोटी की दास्तां
