कविता

सावन आयो री

हिंडोला झूलते कान्हा जी,
झूलों पर झूलें सखियाँ l
मनभावन सावन आया
सखियाँ है करतीं बतियाँ l
कुछ सासुल की बतरावें ,
कुछ साजन संग बिताई रतियाँ l
कुछ शिवजी पर जल चढ़ावैं ,
कुछ पूजैं जा के सतियाँ l
कुछ मन ही मन मुस्कावें ,
कुछ हँस के दिखावें दतियाँ l
मोहे बार – बार टेर बुलावें
झूले पर झूलती सखियाँ ।
कुछ कोने में छुप, बैठ कर
साजन को लिखती पतियां ।
मनभावन सावन आया री
नाचो, गाओ सब सखियाँ ।।

— बृज बाला दौलतानी