गीत/नवगीत

मनुमुक्त मानव को नमन

सौरभ वह मनुमुक्त था, दीपक सा निष्काम।
जलकर जिसने दे दिया, सबको नया मुकाम।।

हरियाणा का लाल था, जन-जन का सम्मान।
मेहनत, साहस, कर्म से, पाया ऊँचा मान।।
कर्तव्य-पथ पर बढ़ चला, लेकर शुभ अंजाम।
सौरभ वह मनुमुक्त था, दीपक सा निष्काम।
जलकर जिसने दे दिया, सबको नया मुकाम।।

वर्दी में विश्वास था, आँखों में था तेज।
जनसेवा के हेतु वह, रहता सदा सचेत।।
त्याग,तपस्या,प्रेम से, कमाया अमिट नाम।
सौरभ वह मनुमुक्त था, दीपक सा निष्काम।
जलकर जिसने दे दिया, सबको नया मुकाम।।

औरों के हित वह जिया, करता रहा उपकार।
जीवन उसके लिए था, सेवा का विस्तार।।
नहीं बना वह स्वार्थ का, धन का कभी गुलाम।
सौरभ वह मनुमुक्त था, दीपक सा निष्काम।
जलकर जिसने दे दिया, सबको नया मुकाम।।

काल भले ही छीन ले, तन का क्षणिक निवास।
लेकिन अमर विचार का, रहता सदा प्रकाश।।
सुख-दुख की हर शाम में, देता रहा पैगाम।
सौरभ वह मनुमुक्त था, दीपक सा निष्काम।
जलकर जिसने दे दिया, सबको नया मुकाम।।

सेवा, साहस, त्याग का, अनुपम था प्रतिमान।
शत-शत नमन तुम्हें सदा, भारत की पहचान।।
जब तक नभ में सूर्य है, जब तक धरती धाम।
गाथाएँ मनुमुक्त की, गूँजें सुबहो-शाम।।
सौरभ वह मनुमुक्त था, दीपक सा निष्काम।
जलकर जिसने दे दिया, सबको नया मुकाम।।

— डॉ. प्रियंका सौरभ

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh

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