सामाजिक

फ्रेंड शिप डे, मित्रता दिवस खास दिन

“दोस्ती एक दुआ है, जो हर दिल पे असर करती है,
कहते हैं कि हर रिश्ता वक़्त, खून या ज़रूरतों से जुड़ा होता ह, मगर दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जो इनमें से किसी की मोहताज नहीं होती। दोस्ती दिल से दिल तक का सफ़र है, ऐसा बंधन जो बिना किसी लालच के जुड़ता है और ज़िंदगी भर साथ चलता है।दोस्ती ना दिखती है, ना तौली जा सकती है, लेकिन जिस दिल में बस जाए, वहाँ गुलाब की तरह महकती है और शफक की तरह चमकती है। दोस्तों के बिना ज़िंदगी अधूरी लगती है। वो हँसी, वो मज़ाक, वो कंधे पर हाथ रखना, किसी आँसू को मुस्कान में बदल देना, यही तो है दोस्ती।
दोस्त वो होते हैं जो हमारे बिना कहे हमारी बात समझ लें, जो हमारे सन्नाटों में भी हमारी पुकार सुन लें, जो मुश्किल दौर में ढाल बन जाएँ और खुशियों के हर पल में सबसे पहले साथ खड़े दिखें।
“दोस्ती की मिसाल क्या दूँ मैं दुनिया को,
ये वो खुशबू है जो साँसों से जाती नहीं।”
कभी-कभी एक दोस्त ही वो इंसान बन जाता है जिससे हम अपने दिल की हर एक बात कह सकते हैं… और जब दुनिया हमसे मुँह फेर ले, तब वही दोस्त बिना कुछ कहे हमारे पास बैठकर हमारी चुप्पी का सहारा बन जाता है।

दोस्ती में कई रंग होते हैं — बचपन की मासूमियत, कॉलेज के दिनों की दीवानगी, ऑफिस की मस्ती और उम्र के हर मोड़ पर एक ज़िम्मेदार हमसफ़र।
बचपन के दोस्त खेल के मैदान से लेकर अपराजित सपनों तक साथ चलते हैं।जवानी के दोस्त, हमारी पहचान बनाते हैं, हमारी हिम्मत, हमारी आवाज़, हमारी लड़ाई बन जाते हैं।
प्रौढ़ अवस्था के दोस्त, ज़िंदगी की सच्चाइयों को साझा करने वाले, समझदारी से भरे सलाहकार होते हैं।इन सभी रिश्तों में एक बात समान होती है, भरोसा, अपनापन और सम्मान।
फ्रेंडशिप डे, मनाने का मक़सद
फ्रेंडशिप डे कोई दिखावे या सोशल मीडिया पर पोस्ट करने का दिन नहीं है , यह दिन है उन अनकहे एहसासों को जाहिर करने का, उन दोस्तों को “थैंक्स” कहने का जो बिना कुछ माँगे हमारी ज़िंदगी में खुशियाँ भरते हैं।
“फूलों जैसी दोस्ती हो, कांटों से दूर,
हर रिश्ता फिक्र माँगे, दोस्ती सिर्फ़ ‘यक़ीन’।”

यह दिन हमें याद दिलाता है कि जिन लोगों ने हमें हंसाया, सहारा दिया, गिरने पर उठाया और कटु सच्चाइयाँ भी मुस्कुराकर बताईं , वही हैं असली दोस्त।
दोस्ती में क्या ज़रूरी है?
सच्ची दोस्ती सिर्फ़ मुस्कुराहटों और मस्ती से नहीं बनती। इसमें ज़रूरत होती है,
वफ़ा की, जो हर परिस्थिति में साथ निभाए।
एतबार की, जो बिना शक रिश्ता कायम रखे।
समझदारी की, जो फैसलों में मदद करे।
इज़्ज़त की, जो हर मतभेद के बाद भी रिश्ते को बनाए रखे।
एक सच्चा दोस्त ना सिर्फ तुम्हारे दुख बाँटता है, बल्कि तुम्हारी ख़ामोशी को भी सुन लेता है।
दोस्ती वो रिश्ता है जिसे न तो लिखा जा सकता है और न ही पूरी तरह समझाया जा सकता है। इसे बस जिया जाता है — हर पल, हर लम्हा, तहे-दिल से।
इस फ्रेंडशिप डे पर चलिए हम उस हर दोस्त को याद करें जिसने हमारी ज़िंदगी में रोशनी की तरह अपना अक्स डाला है। उन्हें एक मैसेज, एक कॉल या बस एक “थैंक यू” कहें — यकीन मानिए, उनका दिन बन जाएगा… और शायद आपका भी।
“दोस्ती एक दुआ है, जो हर दिल में असर करती है,
ये वो रौशनी है जो अंधेरे में भी मुस्कान बिखेरती है।”

आप सभी को फ्रेंडशिप डे की ढेरों शुभकामनाएँ।
दोस्ती जिएं, निभाएँ और बाँटें, क्योंकि यही है ज़िंदगी की असली ख़ूबसूरत तस्वीर है,

— डॉ. मुश्ताक अहमद शाह सहज़

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।