गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आयेगा बुलावा तो जाना पड़ेगा।
माया मोह से हाथ छुड़ाना पड़ेगा।

मस्त हो नींद गहरी में होंगे तब हम।
तुम्हें बार बार ना हमें बुलाना पड़ेगा।

जो मरजी हो बेफिक्र हो करते रहना।
सब ये देख हमें दिल ना दुखाना पड़ेगा।

गिर जाएंगे जब अपनी ही नज़रों से हम।
अपना जनाजा हमें तब खुद उठाना पड़ेगा।

अस्थियां उठा अपनी कहां बहाएंगे हम।
आंखों की गंगा में खुद उन्हें बहाना पड़ेगा।

हर बार दोष हमारा बता बदनाम करते हो।
लगता है अब आईना उसे दिखाना पड़ेगा।

— सुदेश दीक्षित

सुदेश दीक्षित

बैजनाथ कांगडा हि प्र मो 9418291465