कसम हमें है इस मिट्टी की
कसम हमें है इस मिट्टी की, इस से हम को प्यार।
पला बड़ा हूॅं इस मिट्टी में, कर दूं जान निसार।
कूद पड़े थे आजादी को, थे इतने अरमान।
लहू बहा कर इसे बचाया, शहीद हुए जवान।
झूम उठा था देश हमारा, बोल हिंद जयकार।
कसम हमें है इस मिट्टी की, इस से हमको प्यार।
रक्षा सरहद की करने को, बैठे हम तैयार।
इस मिट्टी की खातिर हम, देंगे जीवन वार।
आंख उठा कर मैली देखे, देंगे दुश्मन मार।
कसम हमें है इस मिट्टी की, इस से हम को प्यार।
ऋषि मुनियों की है धरती, पावन है यह धाम।
जन्म लिया श्री भगवन नें, खेलें मोहन राम।
मन को भाती ऋतुएं न्यारी, मनमोहनी बहार।
कसम हमें है इस मिट्टी की, इस से हम को प्यार।
नाम बना है विश्व पटल पर, अपना भारत देश।
चूम रहा है शिखर गगन का, बदल रहा परिवेश।
वीरों ने है दी आजादी, जीवन का उपहार।
कसम हमें है इस मिट्टी की, इस से हम को प्यार।
— शिव सन्याल
