बाल कविता

बाँसुरी

माँ मुझको तू कृष्ण बना दे,
देश-प्रेम की लगन लगा दे ।
छोटा-सा पीताम्बर पहना,
नन्हीं-सी #बाँसुरी दिलादे ॥

मोर-पंख का मुकुट सजीला,
मेरे शीश पर आज सजा दे ।
माखन-मिश्री खूब खिलाकर,
मुझको शक्तिमान बना दे ॥

मेरी बाँसुरी की धुन सुनकर,
नाचती हैं जब सारी सखियां।
बरसाने की गोरी राधा रानी,
मटकाती है प्रेमिल अखियां।।

छोटी-सी राधा रानी-संग,
मैय्या मेरो ब्याह रचा दे॥
ग्वाल-बाल संग माखन खाऊं,
इतना ताज़ा मक्खन दिलादे।

— लीला तिवानी

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244