बाल कविता

विद्यालय

ज्ञान का आगार विद्यालय,
शिक्षा का भंडार विद्यालय,
जीवन में जो संजोए हुए वे,
सपने करे साकार विद्यालय।
लिखना-पढ़ना सिखाता हमको,
जीने का ढंग सिखाता हमको,
चलो बच्चो सब चलें विद्यालय,
जीवन-गीत सुनाता हमको।
पढ़-लिख कर कुछ बनना चाहो,
ज्ञान से घट को भरना चाहो,
आओ बुलाता तुम्हें विद्यालय,
नए आविष्कार जो करना चाहो!
बातें गुरु की ध्यान से सुनना,
नव रचनाएं खुद ही बुनना,
लगन से जुटकर करो पढ़ाई,
सुमन सफलता के तब चुनना।

— लीला तिवानी

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244