मुक्तक
रिश्तों की नैया कैसे नाविक खेता है।
हालचाल भी कौन कहां अब लेता है।
लगा है सूतक हम दोनों के रिश्ते में,
चंद्र ग्रहण का असर दिखाई देता है।
इश्क तुम्हारा दिल के भीतर धरके देखा।
और तुम्हारे संग में हमने मरके देखा।
आंखों की गहराई में तुम उतरे अनहद,
जादू टोना जंतर मंतर करके देखा।
— गुंजन अग्रवाल अनहद
