ग़ज़ल
पहले सीने पर खंजर चलाया गया ।
और फिर उसपे मरहम लगाया गया ।।
थे उजाले भी साजिश में शामिल यहां।
इसलिए जलता दीपक बुझाया गया।।
ख्वाब हरियालियों के दिखा कर कई।
धूप में मुफलिसी को सुलाया गया।।
इस धरा से भी सुंदर है जन्नत वहां।
भटके लोगों को यह भी पढ़ाया गया।।
राहें उलझन भरी और सफर धूप का।
ख्वाब मंजिल का ऐसा दिखाया गया।।
बशर समझाने को जिंदगी का सबक।
पेड़ से एक पत्ता गिराया गया।।
कल का क्या है भरोसा दर्द लिख लो अभी।
क्या पढ़ाया गया क्या सुनाया गया।।
— अशोक दर्द
