वृद्धावस्था में कब्ज : कारण और निवारण
आप जानते हैं कि सभी छोटी-बड़ी बीमारियों की जड़ पेट की खराबी कब्ज है। यों तो सभी उम्रों के लोगों को कब्ज की शिकायत प्रायः हो जाती है और कभी भी हो सकती है, लेकिन 60 वर्ष से ऊपर के लोग विशेष रूप से इस समस्या से पीड़ित रहते हैं। इसके कई कारण हैं, जैसे- शरीर में पानी की कमी, असन्तुलित भोजन करना, पानी कम पीना, सक्रियता की कमी आदि। एक अनुमान के अनुसार 60 प्रतिशत से अधिक वरिष्ठ नागरिक इस शिकायत का सामना प्रायः करते हैं और लगभग 16 प्रतिशत पुराने कब्ज से पीड़ित रहते हैं। अधिक उम्र के लोगों में यह प्रतिशत अधिक होता है। अस्सी वर्ष और उससे अधिक के वरिष्ठ नागरिकों में पुराने कब्ज से पीड़ित लोगों का अनुपात 34 प्रतिशत तक पाया गया है।
ऐलोपैथी आदि चिकित्सा पद्धतियों में कब्ज का कोई उपचार नहीं है। अधिक से अधिक वे कोई रेचक दवा दे देते हैं, जिससे एक-दो बार पेट में जमा मल का कुछ भाग निकल जाता है, लेकिन स्थायी समाधान तब भी नहीं होता। दवाओं की आदत पड़ जाने से रोगी को नयी शिकायतें पैदा हो जाती हैं। केवल प्राकृतिक चिकित्सा ही इस रोग को गम्भीरता से लेती है और उसका प्रभावी स्थायी समाधान कर सकती है।
प्राकृतिक उपचार
कब्ज के उपचार से अधिक उससे बचाव का महत्व है। कब्ज से बचने के लिए हमें पर्याप्त जल पीना चाहिए- दिनभर में लगभग ढाई से तीन लीटर। भोजन भी सन्तुलित, सुपाच्य और रेशेदार होना चाहिए तथा शारीरिक सक्रियता बनाये रखनी चाहिए। अपनी शक्ति के अनुसार नित्य पैदल चलना, हल्का व्यायाम करना और कुछ प्राणायाम करना भी आवश्यक है। इतना ही करते रहें, तो हमें कभी कब्ज की समस्या उत्पन्न नहीं होगी।
यदि कब्ज हो ही गया हो या पुराना पड़ गया हो, तो निम्न उपाय प्रतिदिन लगातार करते रहें-
- सुबह उठते ही एक गिलास गुनगुने जल में आधा नींबू निचोड़कर पियें। पीने से पहले नींबू के बीच पूरी तरह निकाल दें। यदि आपको मधुमेह की शिकायत नहीं है, तो उसमें एक चम्मच शहद भी मिला सकते हैं। इसके 5 या 10 मिनट बाद शौच जायें।
- शौच के बाद पेड़ू (नाभि से नीचे का पेट का आधा भाग) पर बर्फ से ठीक 3 मिनट तक पोंछा लगायें। इसकी विधि यह है कि किसी कटोरी में पानी भरकर फ्रीजर में रखकर बर्फ जमा लें। पौंछा लगाने के लिए उसे निकालकर किसी पतले कपड़े या रूमाल में रखकर पोटली सी बना लें और उसे ऊपर से पकड़कर पेड़ू पर दायें-बायें फिरायें। जोर से न रगड़ें। बर्फ की जगह आइस पैक का भी प्रयोग कर सकते हैं, जो मेडीकल स्टोर पर मिल जाता है। वह अधिक सुविधाजनक रहता है।
- पौंछा लगाने के बाद टहलने निकल जायें और अपनी शक्ति के अनुसार एक-दो किमी टहलें। यदि किसी कारणवश टहलने न जा सकें, तो घर पर ही कुछ व्यायाम करें कि गर्मी आ जाये। यदि यह भी न कर सकें, तो सीने तक कम्बल ओढ़कर कम से कम आधा घंटा लेटें।
यह कार्यक्रम प्रतिदिन करने से पुराने से पुराना कब्ज कुछ ही दिनों में कट जाता है, आँतों में जमा मल धीरे-धीरे निकल जाता है और अनेक शारीरिक और मानसिक शिकायतें अपने आप दूर हो जाती हैं। इस उपचार को दैनिक कार्यक्रम की तरह निरन्तर किया जा सकता है और इससे किसी बुरे पार्श्व प्रभाव (साइड इफैक्ट) की कोई संभावना नहीं है। यह उपाय वरिष्ठ नागरिक ही नहीं, बल्कि किसी भी उम्र के लोग कर सकते हैं।
— डॉ. विजय कुमार सिंघल
