धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

रौशनी बाँटो, मोहब्बत की क्योंकि यही हमारी असली दीवाली है

दीपावली का नाम आते ही आँखों में रौशनी उतर आती है, दिल में अपनापन और ज़ुबान पर दुआएँ सज जाती हैं। यह वह पर्व है जहाँ हर चिराग़ की लौ ज़मीर को जगमगा देती है, जहाँ अँधेरा पीछे हटता है और इंसानियत आगे बढ़ आती है। यह सिर्फ़ त्योहार नहीं, हमारी तहज़ीब का आईना और परम्पराओं का नग़मा है जो पीढ़ियों से हमारी रगों में बहता आया है। जब मिट्टी का दिया जलता है तो उसमें केवल तेल नहीं, हमारी उम्मीदें, आस्था और पुरखों की यादें भी झिलमिलाती हैं। वो छोटी-सी लौ बताती है कि अँधेरा कितना भी गहरा क्यों न हो, एक चिराग़ उसे मिटा सकता है। यही असल संदेश है,हर इंसान अपने भीतर का दीया जलाए, ईमान, मोहब्बत और ख़ुलूस का। दीपावली हमें संस्कृति का वह सबक देती है जो किताबों से नहीं, एहसास से सीखा जाता है। यह बताती है कि सफ़ाई सिर्फ़ घर की नहीं, रूह की भी ज़रूरत होती है। जब हम अपने आँगन को धो-पोंछकर चमकाते हैं, तो दरअसल हम दिल के कोनों से रंजिशें और ग़लत क़दमियाँ भी बुहारते हैं। यह पर्व  केवल उत्सव ही नहीं, इंतज़ाम, इंसानियत और इबादत का संगम है। आज के ज़माने में जब चमक-दमक ने सादगी को ओझल कर दिया है, दीपावली हमें याद दिलाती है कि असली रौशनियाँ बिजली की नहीं, दिल की होती हैं। वो मुस्कान जो बच्चे के चेहरे पर सजी हो, वो सुकून जो बुज़ुर्ग की आँखों में झलके,वही असल दीया है जो समाज में उजाला फैलाता है। दीपावली का मतलब है हर उदासी में उमंग जगाना, हर मन में उम्मीद जलाना। यह पर्व हमें जोड़ता है, हमारी जड़ों की याद दिलाता है और कहता है“रौशनी बाँटो, मोहब्बत बाँटो, क्योंकि यही हमारी असली विरासत है।” इसलिए दीपावली सिर्फ़ त्योहार नहीं, एक तर्जुबा है उस रूहानी सफ़र का जहाँ हर दिया एक दुआ बन जाता है,अँधेरे से उजाले और स्वार्थ से सद्भाव की ओर। यही परम्परा है, यही अभिमान है, यही हमारी असली संस्कृति का आलोक है।

— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।