ग़ज़ल
सोने चाँदी की चाल पूछ रहे
कितना आया उछाल पूछ रहे
किस लिये है उबाल पूछ रहे
लोग अब भी सवाल पूछ रहे
किसने काटा वबाल पूछ रहे
किसने काटी है डाल पूछ रहे
सबको मालूम है सबब लेकिन
लोग फिर भी खयाल पूछ रहे
कुछहक़ीक़त से वास्ता हीनहीं
वो सितारों की चाल पूछ रहे
— हमीद कानपुरी
