नाराज़गी रिश्ते का हिस्सा
जब भी तकरार,
दिल में छुपा होता है,
एक अपनापन।
मौन की दीवार,
सुनती है हर धड़कन,
बिन कहे बातें।
ग़ुस्सा भी तो है,
प्यार की एक परत,
सच्चे लगाव की।
रूठने का अर्थ,
बिखरना नहीं होता,
पास आने का।
नाराज़ लम्हे,
सिखाते हैं हमें फिर,
धैर्य का सलीका।
जो नाराज़ हैं,
वही दिल के क़रीब,
सबसे ज़्यादा हैं।
मुस्कान लौटे,
तो जैसे बहार आई,
रिश्ता महके फिर।
नाराज़गी भी,
रिश्ते का एक हिस्सा,
प्यार की भाषा।
— डॉ. अशोक, पटना
