कुण्डलिया छंद
छाया मौसम ठंड का, ठिठुरे हैं अब गात।
सफर कठिन लगने लगा, खिलती नहीं प्रभात।।
खिलती नहीं प्रभात, ध्यान से राही चलना।
वाहन गति को थाम, सुरक्षा अपनी रखना।।
छुप बैठी है धूप, ठिठुरती है अब काया।।
उष्मा नहीं नवास, कोहरा हैं घन छाया।।
छाया मौसम ठंड का, ठिठुरे हैं अब गात।
सफर कठिन लगने लगा, खिलती नहीं प्रभात।।
खिलती नहीं प्रभात, ध्यान से राही चलना।
वाहन गति को थाम, सुरक्षा अपनी रखना।।
छुप बैठी है धूप, ठिठुरती है अब काया।।
उष्मा नहीं नवास, कोहरा हैं घन छाया।।