पर्दे के पीछे कौन है जरा देखो भी
दूसरों के उकसावे पर
खून उबाल मरवाने वाले मूर्खों
जरा देखो भी कि पर्दे के पीछे कौन है,
अपना कार्य कराने लगा दिये लोग
पर खुद स्थिर,शांत, मौन है,
तुम्हारे जैसे नासमझ अति उत्साही के रहते
उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है,
वो सिर्फ मछली के लिए जाल फेंकता है,
हर समय अपना नफा नुकसान देखता है,
जब जरूरत पड़ी उकसाते हैं,
वो दिलोदिमाग पर कब्जा जमाते हैं,
अपना काम वो खुद क्यों करे,
मुफ्त के मजदूर हर जगह है पड़े,
भावनाओं से खेलने में उनका नहीं कोई सानी है,
अपने रचे ग्रंथों का वो परम ज्ञानी है,
जहां रत्ती भर भी लाभ नहीं वहां क्यों जाते हो,
उनका मामला है उन्हें निबटने दो
बेवजह अपनी टांग क्यों अड़ाते हो,
मतलब साधने की राजनीति उनसे सीखो,
सिर्फ अपना काम करो जैसा हो वैसा दिखो,
चाल,चरित्र और मंशा समझने का प्रयास करो,
अपनी जिंदगी अपना घर परिवार देखो
किसी के लिए जबरन न मरो।
— राजेन्द्र लाहिरी
