गीत/नवगीत

कठिन दौर

धीरे-धीरे सब कुछ ठीक हो जाएगा
दर्द भी आहिस्ता से सो जाएगा
वक्त के थपेड़े तू हंस कर सह ले
यह कठिन दौर भी निकल जाएगा।

जान ले यह तेरे इम्तिहान की घड़ी है
बेवजह क्यों दिल की धड़कन बढ़ी है
इसके बाद और तू निखर जाएगा
यह कठिन दौर भी निकल जाएगा।

मुश्किलों से सबको ही गुजरना पड़ता
इंसान तो हौसलों से उड़ान भरता
सब झंझावतों को पार कर जाएगा
यह कठिन दौर भी निकल जाएगा।

ग़म न कर जो कोई तेरे साथ नही है
आज तेरा साया तक तेरे पास नही है
वक्त का यह मोड़ भी गुजर जाएगा
यह कठिन दौर भी निकल जाएगा।

निराश हो जाने का कोई कारण नही
इससे तो होगा कष्ट का निवारण नही
कर प्रयास संकट से उबर जाएगा
यह कठिन दौर भी निकल जाएगा।

पहले भी कितनी बार तू जूझ चुका है
इस बार क्यों तू मध्य मार्ग रुका है
सारी मुश्किलों से पार पा जाएगा
यह कठिन दौर भी निकल जाएगा।

मुश्किलें तो जीवन का अभिन्न अंग हैं
यह तो हर क्षण ही सबके संग -संग हैं
शीघ्र हार मान बैठे तो बिखर जाएगा
यह कठिन दौर भी निकल जाएगा।

मत भूल ऊपर वाला तेरे साथ है

तेरे सर पर सदा उसका दिव्य हाथ है
उसकी कृपा से भव सिंधु तर जाएगा
यह कठिन दौर भी निकल जाएगा।।

— नवल अग्रवाल

*नवल किशोर अग्रवाल

इलाहाबाद बैंक से अवकाश प्राप्त पलावा, मुम्बई