हाइकु/सेदोका

हायकु

शिव शंकर,

करे जब तांडव,

मिटे दानव।।

कैलाश नाथ,

सिर पर हो हाथ,

तरे संसार।।

बड़े बुजुर्ग, 

हो आदर सम्मान,

संस्कार शान।।

बरगद वे,

चट्टान-से अटल,

गंग निर्मल।।

घर की नींव, 

शीतल घनी छाँव,

अपने बड़े।।

जड़ से जुडो,

नेहिल पतवार,

नैया हो पार।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८