कविता

मॉं कहती है

बच्चों पढ़ो तुम मन लगाकर,
माॅं कहती है हमें ये अक्सर,
तुम हो साहसी ताकतवर,
भगाओ परीक्षाओं का डर ।

परीक्षाएं जीवन का हिस्सा,
मत बनाओं भय का किस्सा,
तुम्हारी मेहनत का ये शीशा,
दिखाती है तुम्हें सही दिशा ।

नहीं कदम उठाना नुकसानदेह,
जहॉं हो कोई भी प्रश्न या संदेह,
गुरुजनों से पूछो तुम निडर स्नेह,
तुम “आनंद” से भरपूर नि:संदेह ।

ईमानदारी से करो तुम पढाई,
अध्ययन में हो रूचि गहराई,
नित्य मेहनत ने तकदीर बनाई,
शिक्षा ने ही किस्मत चमकाई ।

त्याग दो परीक्षाओं का डर,
मत दो तन-मन को ये ज़हर,
भय को मत दो हवा भीतर,
तुम पर करता सब निर्भर ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु