कविता

अनमेल विवाह

लड़के कुंवारे रह रहे 

बुड्ढे ब्याह रचा रहे 

क्वारी लड़कियां को भी 

जवान छोड़ बुड्ढे पसंद आ रहे 

जोड़े बन रहे अनमेल 

दुल्हन छब्बीस की 

दूल्हा बावन का 

*ब्रजेश गुप्ता

मैं भारतीय स्टेट बैंक ,आगरा के प्रशासनिक कार्यालय से प्रबंधक के रूप में 2015 में रिटायर्ड हुआ हूं वर्तमान में पुष्पांजलि गार्डेनिया, सिकंदरा में रिटायर्ड जीवन व्यतीत कर रहा है कुछ माह से मैं अपने विचारों का संकलन कर रहा हूं M- 9917474020