करो नहीं व्यर्थ मनमानी
प्यारे बच्चों,बचाना है बूँद-बूँद पानी,
करो नहीं व्यर्थ मनमानी।
जीवन दाता यह जल है,
धारा पावन अति निर्मल है।।
फूल पौध सबको हैं सींचना,
हरियाली मखमल सजाना।
रंग बिरंगी रंगोली रचना,
प्रकृति सा उपकारी बनना।।
माता पिता की करना सेवा,
पाओगे तुम नेहिल मेवा।
अभ्यास से यश गौरव पाना।
राष्ट्र प्रेम की लौ जलाना।।
साहस से सफलता मिलेगी,
श्रम जय गाथा लिखनी होगी।
रवि किरणों-सा तेजस बनकर,
सुरमई गीत गुनगुनाना होगा।।
