गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आदमी को आदमी के काम आना चाहिए
नाम के जो आदमी हैं, उनसे कहना चाहिए ।।

ठहरे ठहरे पानी में उतरे तो फिर क्या है कमाल
जिसमें तुगयानी हो उस दरया में बहना चाहिए ।।

ये तो सीधी बात का देने लगे उल्टा जवाब
इस नई तहज़ीब से अब कुछ ना कहना चाहिए ।।

आह भरना अश्क़ पीना ही नहीं ग़म का इलाज
ग़म की रुत में कहकहों के साथ रहना चाहिए ।।

कोई ऐसी रात है जिसकी सहर होती नहीं
रोज़ होती है सहर उम्मीद रखना चाहिए ।

— नमिता राकेश

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