सामाजिक

30 अप्रैल : ईमानदारी के संकल्प से गूँजता एक विशेष दिवस

ईमानदारी दिवस हमारे नैतिक चरित्र को सशक्त बनाने और समाज में सच्चाई के प्रति विश्वास जगाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है जिसे हमें केवल एक औपचारिकता के रूप में नहीं बल्कि एक जीवन दर्शन के रूप में अपनाना चाहिए। आज के दौर में जब हर तरफ प्रतिस्पर्धा और स्वार्थ का बोलबाला है तब ईमानदारी ही वह एकमात्र तत्व है जो किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व को गरिमा प्रदान करता है और उसे समाज में विशिष्ट पहचान दिलाता है। वास्तव में ईमानदारी का अर्थ केवल आर्थिक लेन-देन में स्पष्टता रखना या पुलिस और कानून के डर से अपराध न करना ही नहीं है बल्कि इसका वास्तविक अर्थ अपने विचारों और अपनी अंतरात्मा के प्रति पूर्ण रूप से पारदर्शी होना है।​जब एक व्यक्ति ईमानदारी का मार्ग चुनता है तो उसे मानसिक शांति और असीम आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है क्योंकि उसे किसी भी झूठ को छुपाने के लिए किसी अतिरिक्त प्रयास की आवश्यकता नहीं पड़ती। पेशेवर जगत में भी सच्चाई और निष्ठा ही वह नींव है जिस पर बड़े-बड़े संस्थानों और व्यापारिक रिश्तों की इमारत खड़ी होती है क्योंकि बिना भरोसे के कोई भी समझौता लंबे समय तक नहीं टिक सकता। हमारे सामाजिक ढांचे में भी ईमानदारी का उतना ही महत्व है जितना कि शरीर में प्राणों का क्योंकि यदि नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार नहीं होंगे तो राष्ट्र की प्रगति की कल्पना करना भी व्यर्थ है।

​आजकल की दिखावे वाली संस्कृति में अक्सर लोगों को लगता है कि चालाकी और झूठ से वे जल्दी सफ़लता प्राप्त कर लेंगे परंतु ऐसी सफलता रेत के महल की तरह होती है जो समय की एक छोटी सी लहर से ढह जाती है। इसके विपरीत ईमानदारी से हासिल की गई उपलब्धि भले ही देर से मिले लेकिन वह अत्यंत ठोस और सम्मानजनक होती है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मिसाल बनती है। राष्ट्रीय ईमानदारी दिवस पर हम सबको यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने जीवन के हर छोटे-बड़े निर्णय में सच्चाई का साथ देंगे और एक ऐसे पारदर्शी वातावरण का निर्माण करेंगे जहां छल-कपट का कोई स्थान न हो। अंततः हमें यह समझना होगा कि ईमानदारी किसी दूसरे पर किया गया उपकार नहीं है बल्कि यह स्वयं के चरित्र को संवारने और एक सुखी जीवन जीने का सबसे सरल मार्ग है।

— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़ 

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।

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