कविता

ऐसे-ऐसे बोलते हैं हमें

ऐसे-ऐसे बोलते हैं हमें-
हमलोगों को रोज-रोज़
चमार तो कभी चमरोटा
कह कर बुलाते हैं।

ऐसे-ऐसे बोलते हैं हमें-
नाली के कीड़े जैसी
जात है तुम्हारी।
चमरा, चमरोटा कहीं का!

ऐसे-ऐसे बोलते हैं हमें-
नाली कितना भी साफ़ कर लो
साफ़ नहीं होती।
वैसी है तुम्हारी जात!

ऐसे-ऐसे बोलते हैं हमें-
अभी मारूंगा तो,
पूरे कपड़े में हगते-मूतते
घर जाओगे अपने।

ऐसे-ऐसे बोलते हैं हमें-
तुमलोगों के ऊपर
थूकना चाहिए ,
और तुम्हारे जात पर भी !

ऐसे-ऐसे बोलते हैं हमें-
तुमलोग कभी नहीं सुधरोगे
ना ही कभी सुधरेगी,
तुम्हारी जात !

ऐसे-ऐसे कब तक बोलते रहेंगे?
कब तक इंसानियत का जनाजा निकालते रहेंगे?
अब ज़माना जात का नहीं,
फ़ेसबुक, इंस्टा और व्हाट्सऐप का है!

— आनन्द दास

आनन्द दास

आनन्द दास भारत के मूलत: हिन्दी भाषी प्रदेश से हैं पर उनका जन्म कोलकाता में हुआ। उन्होंने प्रारम्भिक शिक्षा राष्ट्रभाषा विद्यालय, सर्वोदय विद्यालय तथा एस. बी. मॉडर्न हाई स्कूल से प्राप्त की हैं। उन्होंने कोलकाता के ऐतिहासिक और विश्व विख्यात प्रेसिडेंसी कॉलेज (प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय) से हिन्दी में स्नातक की हैं। उन्होंने हिन्दी में स्नातकोत्तर कलकत्ता विश्वविद्यालय से तथा शिक्षाशास्त्र में स्नातकोत्तर सी.डी.एल.यू.,सिरसा से की हैं। इसके अलावा यू.जी.सी. नेट(हिंदी) और स्नातकोत्तर डिप्लोमा (अनुवाद) इग्नू से की हैं। कोलकाता के ए.जे.सी. बोस कॉलेज (बी.एड. विभाग) में अतिथि प्रवक्ता के तौर पर कार्य कर चुके हैं। पश्चिमबंग प्राथमिक शिक्षा पर्षद द्वारा संचालित प्रशिक्षण (प्राथमिक कार्यरत शिक्षकों के लिए) कार्यक्रम में बतौर प्रशिक्षक भी कार्य कर चुके हैं। आनन्द दास की हिन्दी में 15 से अधिक संपादित पुस्तकों में शोध लेख प्रकाशित हैं साथ ही हिन्दी के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में आनन्द दास की रचनाएं निरन्तर प्रकाशित होती रहती हैं। वर्तमान में श्री रामकृष्ण बी. टी. कॉलेज (Govt. Aided B.Ed. College), दार्जिलिंग में सहायक प्राध्यापक हैं तथा रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय में शोधरत (पी.एच.डी.) हैं। संपर्क - श्री रामकृष्ण बी. टी. कॉलेज, दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल सरकार के अंतर्गत), 27 गांधी रोड, बागमारी हाउस, दार्जिलिंग - 734101, पश्चिम बंगाल, भारत, संपर्क - 9804551685, anandpcdas@gmail.com

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